विकलांगता, विवाह और प्रेम
कुछ वर्ष पहले गाँव से जुड़े एक दोस्त ने बताया था कि कैसे उसके पड़ोस में एक गरीब परिवार की […]
कुछ वर्ष पहले गाँव से जुड़े एक दोस्त ने बताया था कि कैसे उसके पड़ोस में एक गरीब परिवार की […]
पूरा जीवन उसे अपने को अजीब तरह देखती निगाहों में ही बिताना है और विकलांगता प्रतिशत केवल 29% — वाह, क्या सिस्टम है हमारा। पहले खुद को अपनी विकलांगता के साथ स्वीकार करें।
युद्धजनित विकलांगता का प्रभाव केवल सैनिकों तक सीमित नहीं रहता। आम नागरिक, विशेषकर महिलाएँ और बच्चे, भी इसका शिकार बनते हैं। बमबारी, विस्फोट और हिंसा के कारण अनेक निर्दोष लोग अपनी शारीरिक क्षमताओं से वंचित हो जाते हैं।
आज ना कहीं राजनीति थी, ना ही कोई जूनियर-सीनियर की लकीर, ना कोई जाति का बंधन, सब एक दूसरे से हँसी-खुशी मिल रहे थे। काश! पूरे भारत में भी यही माहौल हो जाये। और शायद यही होली का महत्त्व है जो सारी कुरीतियों, सभी बुराइयों, भेदभाव को अपने रंगों के पीछे ढक लेती है।
भारत को आज केवल स्मार्ट शहरों की ही नहीं बल्कि संवेदनशील शहरों की भी बहुत ज़रूरत है। जहाँ रहने वाले यह समझते हों कि विकलांगता किसी के जीवन का अंत नहीं है।
सोशल मीडिया के इस दौर में जब “लाइक्स” पाना एक पागलपन का रूप ले चुका है — तो मुझे स्टीफ़न हॉकिंग के बारे में आ रही इन पोस्टों पर आश्चर्य नहीं है। लोग चंद लाइक्स पाने के लिये तमाम किस्म के हथकंडे अपनाते हैं।
फिल्में समाज का आइना कही जाती हैं। आइना ही हाशिए को और धुँधला और बदरंग दिखाए तो समाज का असल हाशिया कैसे दिखाई देगा?
हर साल राजस्थान के कोटा, सीकर और देश के अन्य हिस्सों से छात्रों की आत्महत्या और डिप्रेशन की ख़बरें आती रहती हैं — लेकिन सूरज का मामला यह दिखाता है कि हताशा अब ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के एक नए और ख़ौफ़नाक स्तर पर पहुँच गई है।
सम्मानव: विश्व प्रसिद्ध विकलांगजन की प्रेरक गाथाएँ — केवल जीवनियों का संग्रह नहीं है यह इंसानी इच्छाशक्ति की जीत का दस्तावेज़ है। यह किताब आपके बुकशेल्फ़ में सजने के लिए नहीं बल्कि आपके दिल और दिमाग़ में उतरने के लिए लिखी गई है।
बहन ने प्रेमी से यह कहते हुए व्हीलचेयर निकालने का निवेदन किया कि इन सँकरे रास्तों से वे पैदल ही निकल चलेंगे। प्रेमी शायद ठीक से समझ नहीं पा रहा था इसलिए बहन ने झटपट व्हीलचेयर गाड़ी की डिग्गी से निकाल ली। ड्राइवर ने आगे बढ़ कर रास्ता साफ़ करवाना शुरू कर दिया और भीड़ से सुरक्षा के लिए तैनात भी हो गया, उधर असिस्टेंट व्हीलचेयर पुश करने में लग गया। बहन और प्रेमी साथ चलने लगे।
लगभग पूरा भारत मंडपम् (जिसका पहले नाम प्रगति मैदान था) अब व्हीलचेयर के लिये सुगम्य है। इसलिये मैं मेले में खूब घूमा… खूब सारे मित्रो से मुलाकात हुई।
व्हीलचेयर जैसे-तैसे चढी़ तो पता चला कि ए.सी. डिब्बे में आप व्हीलचेयर से अपनी बर्थ तक नहीं पहुँच सकते। अरे भाई विकलांग लोग कोई ए.सी. में यात्रा नहीं करते है, उनके लिए अलग से डिब्बा लगता है न, उसमें जाइए।
कड़वी सच्चाई यह भी है कि जब विकलांगता से प्रभावित व्यक्ति सफल होता है, तब भी उसकी सफलता को पूरी तरह सामान्य नहीं माना जाता। लोग कहते हैं — “इसके लिए तो बहुत मुश्किल रहा ” यह बात सहानुभूति जैसी लगती है, लेकिन इसके पीछे छुपा संदेश यही होता है कि उससे सामान्य सफलता की उम्मीद नहीं थी।
दोस्त का कहना था कि — ‘मैं उसे इतने ध्यान से देख रहा था कि ख़ुद को उसकी जगह महसूस किया और मेरी आँखों में आँसू आ गए थे।’ इन्हीं भावनाओं के अतिरेक में वह पूछता है – ‘क्या उस परिवार का उस विशेष व्यक्ति के प्रति व्यहवार उचित था?
उड़ान के बाद मिकायेला ने अपने अनुभव को बहुत शानदार बताया। उन्होंने कहा कि भारहीनता और अंतरिक्ष का नज़ारा तो अद्भुत था ही लेकिन ऊपर जाने की पूरी प्रक्रिया भी बहुत रोमांचक थी।