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स्पेशल बच्चों की सुरक्षा की चिंता

स्कूल वैन, थेरेपी सेन्टर, किसी रिश्तेदार के घर, किसी फ्रेंड के घर स्पेशल बच्चा एक पल के लिए माँ की आंखों से दूर हुआ कि माँ को अनजान डर सताने लगता है। और ये तो भुल जाइये की केवल बच्चियों को खतरा है ये शैतान मासूम लड़को को भी नही बख्शते।

Taani enjoying pattadakal from her wheelchair

व्हीलचेयर पर बादामी और पत्तदकल की यात्रा

तीन महीने पहले मदुरई रेलवे स्टेशन पर मैं, मेरी सिस्टर और उसके पति ने व्हीलचेयर सीढियों से उतारी क्योंकि यहाँ नीचे उतरने के लिए रैम्प नही था और लिफ्ट भी नही। ऐसे कई सारे स्टेशन हैं जहाँ मुझे काफी बार दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। फिर ट्रेन में एंट्री अलग दुख और स्ट्रगल होता है।

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देखो बेचारा बच्चा, व्हीलचेयर पर है, चल नही पाता

ध्यान दें कि कोई भी व्यक्ति उनके बच्चे के आत्मविश्वास की धज्जियां न उड़ाए। अपने बच्चों पर भरोसा रखें उनकी अनकही एनर्जी और इमोशन को समझें। अगर वे कुछ बता रहे हैं तो उसे समझने की कोशिश करें वरना होगा ये की वे आपसे बोलना/शेयर करना ही न बन्द कर दें।

perfect mother of a special child

परफ़ेक्ट माँ

मुझे लगने लगा था कि मैं तानी का ध्यान नही रख पा रही, मैं बुरी माँ हूँ, मैं अगर इसे थोड़ी देर स्क्रीन टाइम देकर खुद कुछ कर रही हूँ तो मैं स्वार्थी हूँ। इसे स्कूल में छोकडर मैं अगर 1 घण्टा कहीं घूमने जा रही हूँ तो मैं गलत कर रही हूँ पिछे मेरी बच्ची को मेरी जरूरत पड़ी तो?

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UDID कार्ड, निरामया हेल्थ इंश्योरेंस के अलावा भी ज़रूरी है, लीगल गार्जियनशिप सर्टिफ़िकेट

नेशनल ट्रस्ट द्वारा जारी लीगल गार्जियनशिप सर्टिफ़िकेट एक बहुत आवश्यक दस्तावेज़ है जो विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के माता-पिता को बनवा लेना चाहिये।

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विकलांगता- विभक्ति का एक रूप

पूर्णता शरीर की संपूर्णता में नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता में निहित है। जिस दिन हम विकलांग व्यक्ति को ‘बेचारा’ या ‘प्रेरणास्रोत’ कहकर किसी अलग कोष्ठक में रखने के बजाय समान नागरिक और संपूर्ण मनुष्य के रूप में देखेंगे, उसी दिन सद्धभाव को वास्तविक अर्थ प्राप्त होगा।

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आंदोलन – अधिकार की आवाज़

विकलांग बच्चों द्वारा किए जाने रहे ये प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि समाज को यह याद रहे कि शिक्षा कोई दान या कृपा नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार है।

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विकलांगता और समय

यदि विकलांग व्यक्ति घर से निकलने में समर्थ है तो उसके लिए स्थानीय स्तर पर पुस्तकालय, सांस्कृतिक मंच, खेलकूद, साहित्यिक गोष्ठियाँ जैसी समावेशी गतिविधियाँ उपलब्ध होती हैं जिसमें वे अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और समाज के सक्रिय सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

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पुनर्जन्म और विकलांगता

आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि विकलांगता को जैविक, आनुवंशिक, चिकित्सकीय और सामाजिक कारणों के संदर्भ में समझती है। यह दृष्टिकोण हमें यह शिक्षा देता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने अस्तित्व में समान रूप से सम्मान और अवसर का अधिकारी है।

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समझ और सोच

पूरा जीवन उसे अपने को अजीब तरह देखती निगाहों में ही बिताना है और विकलांगता प्रतिशत केवल 29% — वाह, क्या सिस्टम है हमारा। पहले खुद को अपनी विकलांगता के साथ स्वीकार करें।

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युद्ध और विकलांगता

युद्धजनित विकलांगता का प्रभाव केवल सैनिकों तक सीमित नहीं रहता। आम नागरिक, विशेषकर महिलाएँ और बच्चे, भी इसका शिकार बनते हैं। बमबारी, विस्फोट और हिंसा के कारण अनेक निर्दोष लोग अपनी शारीरिक क्षमताओं से वंचित हो जाते हैं।

a wheelchair man playing holi with his friends

मेरी होली के रंग

आज ना कहीं राजनीति थी, ना ही कोई जूनियर-सीनियर की लकीर, ना कोई जाति का बंधन, सब एक दूसरे से हँसी-खुशी मिल रहे थे। काश! पूरे भारत में भी यही माहौल हो जाये। और शायद यही होली का महत्त्व है जो सारी कुरीतियों, सभी बुराइयों, भेदभाव को अपने रंगों के पीछे ढक लेती है।

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विकलांगता और समाज की दो तस्वीरें

भारत को आज केवल स्मार्ट शहरों की ही नहीं बल्कि संवेदनशील शहरों की भी बहुत ज़रूरत है। जहाँ रहने वाले यह समझते हों कि विकलांगता किसी के जीवन का अंत नहीं है।

stephen hawking partying

एप्स्टीन फ़ाइल्स: क्या स्टीफ़न हॉकिंग यौन-शोषण में शामिल थे?

सोशल मीडिया के इस दौर में जब “लाइक्स” पाना एक पागलपन का रूप ले चुका है — तो मुझे स्टीफ़न हॉकिंग के बारे में आ रही इन पोस्टों पर आश्चर्य नहीं है। लोग चंद लाइक्स पाने के लिये तमाम किस्म के हथकंडे अपनाते हैं।